मोनू सुरेश छीपा। द वॉयस ऑफ राजस्थान
डाइट शाहपुरा में जिला एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों का आमुखीकरण प्रशिक्षण आयोजित
मोनू सुरेश छीपा। द वॉयस ऑफ राजस्थान
शाहपुरा/भीलवाड़ा, 13 जून। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) शाहपुरा, भीलवाड़ा में दिनांक 12 जून 2026 को प्रधानाचार्य जगदीश नारायण मीणा की अध्यक्षता में जिला एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों का आमुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अर्जुन लाल बुनकर (सीबीईओ, आसींद) तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती गीता माहेश्वरी (सीबीईओ, शाहपुरा) सहित मांडलगढ़ एवं बनेड़ा के सीबीईओ उपस्थित रहे। प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न ब्लॉकों के शिक्षा अधिकारी, एसीबीईओ, आरपी तथा एडीपीसी प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान पी एंड एम प्रभागाध्यक्ष एवं उपप्रधानाचार्य सुश्री रश्मि पुरी गोस्वामी ने डाइट के वार्षिक पंचांग की विस्तृत जानकारी प्रदान की तथा कक्षा 5वीं एवं 8वीं बोर्ड परीक्षाओं में जिले की सामान्य शैक्षिक स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने डाइट के विभिन्न प्रभागों द्वारा वर्षभर आयोजित किए जाने वाले प्रशिक्षण, शोध कार्यशालाओं एवं प्रसार गतिविधियों की जानकारी देते हुए गत वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा प्रस्तुत की तथा वर्ष 2026-27 के पंचांग का अनुमोदन कराया।
इस अवसर पर आईएफआईसी प्रभाग द्वारा प्रकाशित डाइट के विभिन्न वार्षिक प्रकाशनों—वार्षिक पत्रिका “समन्वय”, “शोध स्पंदन”, जिला शोध प्रथम एवं द्वितीय संकलन, संयुक्त राज्य स्तरीय शोध प्रकाशन तथा विभिन्न प्रभागों के फोल्डर एवं ब्रोशर—का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में डाइट के प्रभागाध्यक्ष विष्णु कुमार वैष्णव, अरविंद चौहान, दुर्गेश कुमार सेन, धर्मीचंद जैन, अनिल मोहनपुरिया एवं नारायण लाल बलाई सहित अन्य अधिकारियों ने अपने-अपने प्रभागों की गतिविधियों तथा सत्रभर आयोजित होने वाले प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं की जानकारी साझा की। साथ ही आगामी कैलेंडर वर्ष में विभिन्न नवाचारों एवं शाला संबलन संबंधी योजनाओं पर भी चर्चा की गई।
प्रशिक्षण के दौरान पुस्तकालयों के प्रभावी उपयोग एवं छात्र हित में उनकी भूमिका पर अब्दुल शरीफ मोहम्मद (टाटा ट्रस्ट) द्वारा विशेष वार्ता प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम में डाइट के समस्त व्याख्याताओं, संस्थापन अधिकारी कैलाश चंद्र शर्मा एवं अन्य स्टाफ सदस्यों की उपस्थिति रही। प्रशिक्षण का उद्देश्य शैक्षणिक गुणवत्ता संवर्धन, शोध गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को एक साझा मंच प्रदान करना रहा।
